बीपी मरीजों के लिए बड़ी राहत: रोज़ दवा खाने की झंझट खत्म करने वाला नया वैज्ञानिक समाधान

हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में दुनियाभर में 30-79 साल की उम्र के 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्कों को हाइपरटेंशन की समस्या थी। ये आंकड़ा इस आयु वाले कुल लोगों का करीब 33% है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में भी हाइपरटेंशन की दिक्कत बढ़ती जा रही है, जो कम उम्र में ही उन्हें कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का शिकार बनाने वाली हो सकती है।

हाइपरटेंशन के शिकार मरीजों को डॉक्टर नियमित रूप से दवा लेते रहने की सलाह देते हैं, ताकि उन्हें ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की दिक्कतों से बचाया जा सके। मरीजों को जीवनभर ये दवाएं लेनी पड़ सकती हैं।

ऐसे लोगों के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसा तरीका ढूंढ लिया है जिसकी मदद से बिना दवाओं के भी आप ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकते है। शोधकर्ताओं ने बीपी की दवाओं का विकल्प तलाश लिया है।

ये भी पढ़ें :  महिला सशक्तिकरण पर फोकस: बजट 2026 में लखपति दीदी से लेकर शी मार्ट्स तक, महिलाओं को कई तोहफे

बिना दवाओं के कंट्रोल हो सकेगा ब्लड प्रेशर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दशकों से हर दिन बिना गैप किए एक गोली खाते रहने को हाई बीपी का सबसे प्रभावी इलाज माना जाता रहा है। मरीजों को बीपी की दवाओं पर पूरी तरह निर्भर हो जाना पड़ता है। हालांकि अब ऐसे लोगों के लिए राहत वाली खबर सामने आ रही है।
 
    शोधकर्ताओं की टीम ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि जल्द ही रोजाना बिना दवा लिए भी आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रख पाएंगे।
    इसके लिए विकल्प के तौर पर एक इंजेक्शन की काफी चर्चा है, जिसे गोलियों की जगह साल में सिर्फ दो बार लेने से आप बीपी को कंट्रोल में रख पाएंगे।  
    जिलेबेसिरन नाम के इस इंजेक्शन को विशेषज्ञ भविष्य के लिए काफी असरदार उपाय के तौर पर देख रहे हैं।

हाइपरटेंशन और कई गंभीर समस्याओं का कम होगा खतरा
द लैंसेट जर्नल में इस इंजेक्शन से बीपी को मरीजों को होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से हाइपरटेंशन को मैनेज करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दशकों से मौजूद दवाओं के बावजूद हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या दुनियाभर में बढ़ती ही जा रही है।

ये भी पढ़ें :  प्योर ईवी ने लॉन्च किया रोमांचक कैशबैक ऑफर के साथ 'प्योर परफेक्ट 10' रेफरल प्रोग्राम

    माना जा रहा है कि जिलेबेसिरन इंजेक्शन लंबे समय तक हाइपरटेंशन को कंट्रोल में रखने में मददगार हो सकती है।
    इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के साथ किडनी-आंख की समस्याओं के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
    हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को अगर बेहतर तरीके से कंट्रोल कर लिया जाए तो इसके कारण होने वाली बीमारियों का बोझ भी स्वास्थ्य सेवाओं से कम किया जा सकता है।

कैसे काम करेगी ये इंजेक्शन?
इस इंजेक्शन को लेकर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक फिलहाल ये अपने लेट-स्टेज ग्लोबल ट्रायल में हैं।  साल में दो बार लगने वाले इस इंजेक्शन से हाई बीपी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
 
    रोश और एल्नीलम फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित जिलेबेसिरन इंजेक्शन को साल में दो बार लगवाने की जरूरत होगी।
    इसमें लिवर में एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को कम करने के लिए स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए (siRNA) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।
    एंजियोटेंसिनोजेन एक प्रोटीन है जो ब्लड प्रेशर रेगुलेशन के लिए जरूरी है।
    एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को धीमा करके यह इंजेक्शन करीब छह महीने तक ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकती है।
    मिड-स्टेज अच्छे नतीजों के बाद अब ये फेज 3 ट्रायल्स में है।

ये भी पढ़ें :  हर दिन टोल प्लाजा से कितनी कमाई करता है भारत? जानिए सबसे ज्यादा रेवेन्यू कहां से आता है

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञ कहते हैं, शुरुआती ट्रायल्स से पता चलता है कि ये इंजेक्शन असरदार हो सकती है, लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन जिंदगी भर चलने वाली बीमारी है और ये थेरेपी अभी क्लिनिकल जांच के तहत हैं। स्टैंडर्ड इलाज यानी रोजाना ली जाने वाली दवाओं की जगह लेने के लिए ये कितनी प्रभावी है, फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है।  

 

Share

Leave a Comment